एक दिन भारत के प्रथम गृहमंत्री आदरणीय वल्लभ भाई पटेल मेरे सपने में आये , बहुत दुखी लग रहे थे. मैंने सादर अभिनन्दन कर उनसे पूछा, क्या बात है? आप इतने दुखी क्यों लग रहे हैं ? मेरे इतना पूछते हीं उनके वेदना कि धारा फूट पड़ी . कहने लगे क्या बताऊँ भारत कि दुर्दशा अब देखी नहीं जा रही .क्या यही दिन देखने के लिए नरमपंथियों ,हम जैसे मध्यमार्गियों और क्रांतिवीरों ने संघर्ष किया था ? ये हमारा आज़ादी, 1857 से लेकर 1947 तक न जाने कितने या सच कहें तो अन अनगिनत लोगों के बलिदानों का प्रतिफल था . क्या क्या सपने देखे थे हमलोगों ने स्वतंत्र भारत के स्वरुप और हमारे लोगो के विकास को लेकर . नारद मुनि जब पृथ्वी भ्रमण से लौटकर यहाँ कि बातें बताते हैं तो कलेजा फट जाता है . हमारे नेता को तो कोई दर्द है नहीं ,वो तो यहाँ भी ............. माउन्टबेटन के पीछे घूमते थे और वहां भी समविचार वाले देवराज के साथ लगे रहते हैं .बापू तो बस बटवारे कि
की सहमति देने से भी बड़ी गलती करने के दर्द से कोमा में ही चले गए हैं . अब मेरी चौंकने कि बारी थी . मैं तपाक से पूछ बैठा ,बटवारे से भी बड़ी गलती ?
उन्होंने एक ठंढ़ी आह भरी और कहने लगे , हाँ बटवारे से भी बड़ी गलती “अपने प्रिय शिष्य की प्रियदर्शिनी को अपना उपनाम देकर” . इन दोनों गलतियों कि सजा देश आज तक भुगत रहा है . एक भारत को बाहर से अपने सैनिक और भाड़े के सिपाहियों द्वारा परेशां करता रहता है . दूसरा खानदान भारत और यहाँ की जनता के कुंडली में कालसर्पयोग कि तरह बैठ गया है और वो भी बापू के उपनाम के सहारे . अब बेचारी भारत कि जनता गाँधी और काग्रेस के एहसानो से ऐसी लदी पड़ी है कि ये जानते हुए भी कि न ये असली गाँधी हैं और न ही आज कि कांग्रेस 127 साल पुरानी वो असली कांग्रेस .फिर भी जनता मुगालते मे आकर लोकतान्त्रिक तरीके से इनलोगों के राजतान्त्रिक सत्ता पर मुहर लगा देती है और फिर अगले 5 सालों तक अपने हीं पीठपर चाबुक चलने का अधिकार इन्हें दे देती है . अब पहली गलती में तो कुछ मज़बूरी भी रही हो सकती है ,पर इस दूसरी गलती का सदमा बापू बर्दास्त नहीं कर पाए . मेरी जिज्ञासा बढ़ रही थी कि तभी वो उठकर खड़े हो गए .मैंने पूछा क्या हुआ तो कहने लगे मन बहुत भारी हो गया है ,मैं फिर आऊंगा . और तभी अलार्म कि घंटी से मेरी नींद खुल गयी . मुझे पुनः उनसे मुलाकात का इंतजार रहेगा ,और मैं हमारी बातचीत आप तक भी पहुंचाऊंगा .......................... क्रमशः
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