रविवार, 10 जून 2012

अपने को एक बुरी बीमारी है ...सपने देखने की...तरह-तरह के सपने आते हैं क्या करूँ? कभी कोई सपना सच नहीं होता... पर एक दिन अपुन गरीब का भी एक सपना सच हो गया ........
.....एक रात मेरे सपने में आहलुवालिया जी आये ...अरे नहीं पहचाना क्या? अ..र..रेरे अपने मोंटेकसिंह जी ...बोले यार गंजे बड़ी फद्द हो रही हैं..
मैंने पुछा- किस बारे में .....?
वे बोले ...अरे उसी गरीबी वाली बात पे..../
मैं बोला... हा यार आपने तो हद्द ही कर दी ३५ रुपये में ....
.वो बीच मैं बात काट के बोले - मत याद दिला यार...सोच कित्ता कठीन काम है गरीब देश में ज्यादा गरीब ढूँढना.....अब सब को तो गरीब कह नहीं सकते ना... वर्ना जनता पूछती ६० साल से क्या झक मार रहे थे ....... ये कुछ ऐसा हि कठीन काम है.. जैसे कि रिजेक्टेड सड़े गले आलू–प्याज में से सेलेक्टेड आलू प्याज ढूँढना ..
मैंने हस के कहा ...यनी एक तो रिजेक्टेड और उसमें भी सेलेक्टेड
वो बोले ....ओफ्फ्फ्फ़ हाँ ....यार, बहुत प्लानिंग कि सर्वे किये ...ये पता करेने, कि कोई आदमी इस गरीब देश में गरीब कब कहलाये..., यहाँ तक कि, सर्वे के लिए राहुल बाबा को भी भेजा... गरीबों के घर...पर तू तो जानता ही हैं ना, वो तो मस्त खाना-विना खाए और खाट पे लंबी तान के सो गए, ...खैर छोड क्या बोलना उनके बारे... सारा देश जानता ही है......
मैंने उनकी परेशानी भाप ..हम्म में सर हिलाया/
वो बोले - यार कोई आईडिया-वीडिया देना, कैसे प्लानिंग करूँ....वाट लगी पड़ी हैं अपुन की...
मैंने उन्हें बीच में ही टोक कहा .... और देश की भी ...
वो बोले- छोड ना देश को ....कुछ आईडिया देना...
मैंने कहा ...किस बारे में?
वे बोले –प्लानिंग के बारे में...कैसे अच्छे और सच्चे प्लान बनाये ... 
मैं बोला ..भाई में क्या आईडिया दूँ ...मैं कुछ नहीं जानता प्लानिंग्-व्लानिग के बारे में ....
मोंटेकजी चुटकी ले बोले ... क्यों बे गंजे फेस बुक पे तो बड़ी लंबी-लंबी छोड़ता हैं, अब जब मैं कुछ आइडिया मांग रहा हूँ, तो साप सूंघ गए.....
मैंने अपने गंजे सर को खुजलाया, और मन ही मन सोचा, उधर फेस-बुक पे कुछ भी फेकने में क्या जाता हैं....सिवाए इन्टरनेट के बिल के ...पर इनको को क्या बोलू ....
मैंने कहा, भाई आप अपने मनु भाई से आईडिया लो ना, बड़े वाले इकोनोमिस्ट हैं वो... वे ही कुछ बतलायेंगे../
मोंटेकजी बोले...अब क्या कहूँ? वो तो पिछले ५-६ सालों से मौन व्रत पे हैं, कुछ भी पूछो... कुछ भी करो, कुछ बोलते ही नहीं ....बड़े संत पुरुष हैं/
मैंने कहा - तो किसी और से पूछो भाई...आप के पास...दीदी है ...दादा है.. अम्मा है मेरे पास क्या है?
वो गुस्से में तम-तमा के बोले, बस बस ...इसे पूछ.. उसे पूछ... खुद कोई जोम्मेदारी ना लेना ...देश इसी लिए तो आगे नहीं आ पा रहा है , सब को अधिकार चाहिए ...कोई कर्तव्य नहीं निभाना चाहता......./
मैंने सोचा, बाबा अगर आज मैंने इनको एक आईडिया नहीं दिया, तो देश कि लाइफ चेनज होने से रह जायेगी...
मैंने किसी कुशल डाक्टर के तरह पुछा अच्छा ...आपकी प्रॉब्लम क्या है..?
वो बोले – आईडिया ही नहीं आते ..प्लानिंग क्या ख़ाक करूँ.../ 
....उनकी बात सुन, अचानक मेरे दीमाग में एक बात आई... [बॉस अपना भेजा जब कभी क्रिएटिव वे में चलता है तो सिर्फ एक ही जगह पे, वो है - टॉयलेट, हो न हो इनके टॉयलेट में हि कुछ लोचा होगा जो आईडिया नहीं आ रहे,....] सो मैंने सवाल किया -बॉस आपका टॉयलेट कैसा हैं?
वो अजीब सा मुह बना के बोले, इस से तुम्हे क्या मतलब भाई?
मैंने कहा –सिर्फ ये कहो कि टॉयलेट कैसा है? 
वो बड़े दुखी हो बोले - क्या कहूँ बहुत बुरा है..
मैं मन ही मन खुश हुआ, सोचा चलो, अब आईडिया चीटका सकता हूँ,
मैंने पुछा -क्यों ?
वे बोले ...क्या करे? जब भी नया अच्छा टॉयलेट बनाते हैं, उसमे से कोई ना कोई लोटा और बाकी सामान चुरा भाग जाता है...
मैंने आश्चर्य से उनकी ओर देख पुछा ...आपके ऑफिस..... मेरा मतलब है कि, सरकारी महकमे में भी लुटिया चोट्टे होते हैं क्या?
वो शर्मा के बोले ....बस क्या गंजे भाई... आप भी ना .....फिरकी लेते हो ... हमारे यहाँ को छोड और कहा होते?
मैंने कहा भाई आप कि प्रॉब्लम का झक्कास सोलुशन मिल गया ...
वो खुश होगये और बोले ..क्या ?
मैंने कहा बॉस आप खुद के लिए और आपके पट्ठो के लिए सुपर-डुपर टॉयलेट बना डालिए
वो तुनक के बोले ...उस से क्या होगा? ये भी भला कोई हल हुआ ?
मैंने उन्हें अपना सीक्रेटे ज्ञान झाड़ा .... कि अच्छा टॉयलेट ही, अच्छे आईडिया कि जन्म स्थली है.. 
उन्होंने संदेह जताया ....पर फिर से कोई लोटा और टॉयलेट का सामान चुरा ले गया तब ?
मैंने कहा- सी सी टीवी कैमरा लगा दो...
वो बोले -अंदर ...?
मैंने कहा- अरे नहीं भाई, दरवाजे पे, ताकि कोई लुटिया या और सामान चुराए तो पकड में आजाये/
वो बेहद खुश हो गये और गले लगा बोले... वाह क्या आईडिया हैं सरजी....
मैंने कहा भाई... ये आईडिया तो देश कि लाइफ चेनज कर दे गा ना...?
वो बोले भाई कर तो सकता है बशर्ते ये ही सरकार अगली बार बने , क्यों कि प्लानिंग करते-करते एक दो साल तो लग हि जायेंगे, और तब तक हो सकता है नई सरकार बन जाये, क्यों कि अभी के इनके कर्म देखते हुए तो ये नहीं लगता कि ये ही सरकार रहेगी... फिर नयी सरकार नयी प्लानिग...पर हाँ अगर ये ही सरकार रही तो देश कि पक्के में लाइफ चेनज ...
और बस तभी मेरी आँख खुल गई ... सामने अखबार रखा था जिस पे ...एक हेड लाइन चमक रही थी “३५ लाख का टॉयलेट ......”  विवेक ........एक फेसबुक मित्र के पोस्ट से साभार 

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